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मानव अस्तित्व की पहचान

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IDENTIFICATION OF HUMAN EXISTENCE SHASHANK SHARMA.                                          "मानव सभ्यता का उद्भव " "Stone age" भारत में मानव अस्तित्व की पहचान : मानव जीवन काफी समय पहले प्रारंभ हुआ इसका अधिकांश क्रियाकलाप अलिखित ही रहा और यही अलिखित भूतकाल प्राक: इतिहास की रचना करता है। आज वर्तमान परिवेश में मानव इतिहास का एक छोटा सा काल है जो लिखित रूप से मौजूद है जो इतिहास का निर्माण करता है, अर्थात मानव इतिहास की संपूर्ण 90% घटनाएं प्रस्तर युग में ही घटित हुई । इसका प्रमाणिक साक्ष्य सिर्फ पाषाण-प्रस्तर उपकरण (stone tools) और आदिम भित्ति चित्रकारियां जो किसी शिकार अथवा समारोह से संबंधित है।  Radiation theory : विकिरण प्रक्रिया   आधुनिक मानव का विकास अफ्रीका में "होमोइरेक्टस" से हुआ, बाद में यह विभिन्न मार्गों से प्रवासन करते हुए पृथ्वी के विभिन्न भागों में बस गए जिसे विकिरण सिद्धांत कहा गया है । पृथ्वी के सभी क्षेत्रों वह जातियों के मानव डीएनए क...

BASIC STRUCTURE OF HISTORY

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शशांक शर्मा :  "इतिहास" एक परिचय :                                         इतिहास भूतकाल की घटनाओं का मुख्य लेखा-जोखा है। इतिहास अपने ज्ञान रूपी प्रकाश से वर्तमान को प्रेरित करता है और भविष्य के लिए दिशा निर्देशन का कार्य करता है। इतिहास विषयक परम सूची में हमें राष्ट्रीय सामाजिक सांस्कृतिक जीवन की सुंदर झांकी देखने को मिलती है। किसी भी वैश्विक मंच पर उसके उद्भव, विकास, पतन , त्याग-बलिदान स्वाभिमान विजय-पराजय राजनीति, धार्मिक नीति, सभ्यता व संस्कृति कला तथा साहित्य आदि के संदर्भ में इतिहास द्वारा प्रमुख ज्ञान बोध होता है। जिससे उन घटनाओं का वैज्ञानिक परिवेश में अध्ययन हो सके। इस प्रकार अतीत को ही वर्तमान संदर्भ में इतिहास का नाम दिया है जिसमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण का पूर्ण समावेश हो तथा अध्ययन पूर्णत: निष्पक्ष तथा इमानदारी पूर्वक किया गया हो। Definition of history:  इतिहास शब्द 3 शब्दों ( इति + ह + आस ) से मिलकर बना है,जो  अस् धातु, लिट् अलंकार अन्य पुरुष तथा एक वचन...

अतीत में पर्यावरणीय संबंध

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शशांक शर्मा : भारत या किसी भी क्षेत्र विशेष का यदि ऐतिहासिक शोध की रूपरेखा बनाई जाए ,तो अध्यन में हम पाएंगे की किस प्रकार इतिहास और पर्यावरण पारिस्थितिक संबंध  बनाए रखते है । यदि किसी भी क्षेत्र को देखे तो हमे कहीं समृद्ध संस्कृति और सभ्यता के दर्शन होते है तो कहीं आदिम बर्बर जनजाति के दर्शन होते है । भौतिक क्षेत्र का ऐतिहसिक आध्यन से पता चलता है , उसकी सीमा में कितने प्राकृतिक और मूल संसाधन भौतिक परिवर्तन के प्रभावी घटक है । उदाहरण स्वरूप " मीठे पानी की नदी और उसका उपजाऊ डेल्टा , वहां पाए गए प्राकृतिक खनिज सम्पदा ( लोहा , कोयला , तांबा ) , जंगली जानवर मवेशी इत्यादि व उस क्षेत्र की सुदृढ़ भौगोलिक सीमाएं आदि जैसे प्राचीन मगध साम्राज्य " आदि मूलभूत सुविधाओं से एक समृद्ध संस्कृति पनपती है और देखते ही देखते विशाल साम्राज्य में बदल जाती है ।     यदि उत्तर-पश्चिम की बात की जाए तो हमने पढ़ा अथवा देखा पारिस्थितिकी परिवर्तन से ( नदियों का मार्ग बदलना , नदियों का सुखना , क्रमशः सूखा , अकाल , आक्रमण ) से बड़ी बड़ी सभ्यताएं पतनावस्था में आ पहुंची तत्पश्चात जनमानस ने मीठे पानी...